Tuesday, 3 September 2013

आदमी


आदमी का दस्तूर है कैसा ,
उसके लिये सब कुछ है पैसा .

डूबे पाप में आकण्ठ ,
चाहे फिर भी बैकुण्ठ .

बोले जीवन में इतना झूठ ,
रह गया सत्य का वृक्ष ठुठ .



बगल में छुरी , मुहं में राम ,
पाप कटाने घूमे चारों धाम .

खेल अजब है आदमी का देख ,
शरीर एक ,मगर चेहरे अनेक .

धर्म की करता सार्थक बातें ,
मौका मिलते ही करता घाते .

खाकर चोट खुद है बडा रोता ,
दुसरों के तन में काँटे चुभोता . 

जिस दिन ये अपना असल रुप दिखलायेगा ,
शायद उसी दिन आदमी , मानव कहलायेगा


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Thursday, 22 August 2013

भारतीय शिक्षा पद्धति में दंड का वैज्ञानिक महत्त्व -

भारतीय शिक्षा पद्धति में दंड का वैज्ञानिक महत्त्व -
"चलो कान पकड़ो और उठक बैठक लगाओ" यह सज़ा मास्टरजी क्यों देते है , ये शायद उन्हें खुद भी नहीं मालुम होगा. आपको ये जानकर हैरानी होगी की ये सज़ा भारत में प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति के समय से चली आ रही है. तब यह सिर्फ उन बच्चों की दी जाती थी जो पढाई में कमज़ोर थे. पर अब हर किसी बच्चे को किसी भी गलती के लिए दे देते है ; क्योंकि उन्हें इसके पीछे का विज्ञान नहीं पता.
हाथ क्रॉस कर कान पकड़ने की मुद्रा ब्रेन के मेमोरी सेल्स की ओर रक्त संचालन में वृद्धि करती है. साथ ही यह ब्रेन के दाए और बाए हिस्से में संतुलन स्थापित कर ब्रेन के कार्य को और बेहतर बनाती है. यह मुद्रा चंचल वृत्ति को शांत भी करती है. कान में मौजूद एक्युप्रेशर के बिंदु नर्व्ज़ के कार्य को सुचारू बनाते है और बुद्धि का विकास करते है. यह मुद्रा ऑटिज्म , एसपर्जर सिंड्रोम , लर्निंग डिसेबिलिटी , बिहेवियर प्रॉब्लम में भी मदद करती है.

आज हम स्मरण शक्ति बढाने वाली इस मुद्रा को भुला चुके है और दुसरी तरह की सज़ा जैसे हेड डाउन , क्लास के बाहर निकालना , अर्थ दंड आदि देते है. पर पश्चिमी देशों में इसका बहुत उपयोग किया जा रहा है| इसे कई बीमारियों में भी करने का परामर्श दिया जा रहा है |

अमेरिका में इसे याद्दास्थ बढाने वाला सुपर पावर योगा कहा गया है | (यह लाइन लिखनी जरुरी थी नहीं तो लोग इसको भी गप्प मानते)...

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Wednesday, 21 August 2013

'बस एक मिनट'

 'बस एक मिनट'


अक्सर हम बात बात में कह देते है की 'बस एक मिनट' और इसे बेहद मामूली समय समझते है, लेकिन आपको पता नही की इस एक मिनट में दुनिया में क्या क्या हो जाता है !
1मिनट में गूगल पर 6,94,445 सर्च हो जाते है !
98 हजार ट्विट हो जाते है और 320 अकाउंट भी खुल जाते है !
60 नए ब्लॉग अकाउंट खुल जाते है ! 


37000 लोग कॉल कर लेते है स्काइप पर !
600 नए विडियो अपलोड हो जाते है यूटयूब पर !
6600 फिल्मे अपलोड हो जाती है फिल्कर पर !
150 करोड़ टेक्स्ट मैसेज भेजे दिये जाते है!
168 करोड़ ईमेल भेज दिए जाते है !
3 करोड़ कोशिकाए मर जाती है हमारे शरीरकी !
15000 डॉलर कमा लेते है बिल गेट्स !
7 लोग मर जाते है धुम्रपान से !
1 करोड़ सिगरेट पी ली जाती है !
258 शिशुओ का जन्म हो जाता है !
13000 हिट हो जाते है म्यूजिक स्ट्रिमिंग पैण्डोर पर !
360 बार बिजली भी गिर जाती है पृथ्वी पर !
और 'एक मिनट' में मैंने ये सब लिख भी दिया अब क्या आप हमे लाइक और शेयर करने के लिए 2 सेकंड भी नहीं दे सकते?



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प्रकृति के संकेत खाद्य पदार्थ

1. अखरोट की रचना सिर की तरह होती है तथा उसके अंदर भरा हुआ गूदा मस्तिष्क की तरह होता है। यही गूदा पर्याप्त मात्रा में नियमित सेवन करने से सिर संबंधी समस्याओं पर कंट्रोल होता है तथा मस्तिष्क की कार्य क्षमता एवं क्रिया प्रणाली में पॉजीटिव प्रभाव नजर आने लगता है।


2. पिस्ता आँख की भाँति दिखाई देता है। पिस्ते के अंदर का खाया जाने वाला हरे रंग का हिस्सा आँख के लिए परम लाभदायक होता है, इसलिए नेत्रों के लिए परम लाभदायक होता है। नेत्र लाभ के लिए कुछ मात्रा में पिस्ते का सेवन हमें करना चाहिए या यूँ कहें कि नेत्र रोगों के इलाज में पिस्ता आपकी सहायता कर सकता है।

3. जिन्होंने किडनी को देखा है या जो उसके आकार से परिचित हैं, वे यह कह सकते हैं कि काजू, सोयाबीन तथा किडनी बीन जैसे कुछ मेवे तथा फली वाले अनाज वगैरह किडनी को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

4. किशमिश या अंगूर की रचना पित्ताशय (गाल ब्लैडर) से बहुत कुछ 'मैच' करती है, इसीलिए पित्ताशय को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए किशमिश या अंगूर का सेवन लाभदायक हो सकता है।

5. बादाम का आकार जहाँ एक ओर नेत्रों की तरह होता है, वहीं दूसरी ओर उसकी समानता मस्तिष्क से भी की जा सकती है। बादाम का नियमित सेवन नेत्र तथा मस्तिष्क दोनों ही के लिए परम प्रभावी होता है।

6. अनार के दानों का रंग रक्त के समान होने से अनारदानों का रस रक्त शोधक (खून की सफाई करने वाला) एवं रक्तर्द्धक (खून बढ़ाने वाला) होता है।

7. सेवफल का आकार और रंग भी बहुत कुछ हृदय के समान होता है, इसलिए सेवफल का नियमित सेवन हृदय के लिए विशेष लाभदायक होता है।

8. नारंगी की फाँकें किडनी और आँत से मेल खाती हैं, इसीलिए इसका नियमित सेवन किडनी तथा आँत के लिए फायदेमंद है।

9. गिलकी या घिया और तोरई आँत के एक भाग की तरह दिखाई देती है, इसलिए आँत की क्रिया प्रणाली को व्यवस्थित करने में इसका जवाब नहीं इनमें 'रफेज' की मात्रा भी बहुत है।

10. लम्बी-पतली ककड़ी तो मानो आँत ही हो। इसका सेवन कब्ज दूर करता है और आँत क्रिया प्रणाली को नियमित करता है। ऐसे अनेक प्राकृतिक संकेत या संदेश वनस्पतिज पदार्थों में छिपे हुए हैं, जिनको समझकर स्वास्थ्य लाभ उठाया जा सकता है।
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इक हरामखोर आदमखोर नेता इस वतन कोबेच देताहै.

कोई टोपी तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है,
मिले गर भाव अच्छा जज भी कुर्सी बेच देता है,
तवायफ फिर भी अच्छी है के वो सीमित है कोठे तक,
पुलिस वाला तो चौराहे पे वर्दी बेच देता है,
जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी,
जिस बेटी की खातिर बाप किडनी बेच देता है,
कोई मासूम लड़की प्यार में कुर्बान है जिस पर,
बना कर विडियो उसकी वो प्रेमी बेचदेता है,
ये कलयुग है कोई भी चीज नामुमकिन नहीं इसमें,
कलि, फल, पेड़, पोधे, फुल माली बेच देता है,
जुए में बिक गया हु मैं तो हैरत क्यों है लोगो को,
युधिष्ठर तो जुए में अपनी पत्नी बेच देता है,
कोयले की दलाली में है मुह काला यहाँ सब का,
इन्साफ की क्या बात करे इंसान ईमान बेच देता है,
जान दे दी वतन पर जिन बेनाम शहीदों ने,
इक हरामखोर आदमखोर नेता इस वतन कोबेच देताहै.

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भारतीय तो कहीं मिले ही नही

एक अमेरिकी भारत में घूमने के लिए आता है और जब वापस अमेरिका पहुचता है तो उसका एक भारतीय मूल का मित्र
उससे पूछता है- कैसा रहा भारत का दर्शन ??
वह बोलता है- "वास्तव में भारत एक अद्वितीय जगह है. मैंने ताजमहल देखा, दिल्ली, मुंबई से लेकर भारत की हर
वह छोटी बड़ी जगह देखी जो प्रसिद्द है.
.
वास्तव में भारत केवल एक ही है, कोई दूसरा नहीं."
.
भारतीय अपने देश की तारीफ सुनकर बहुत खुश हुआ. और पूछा "हमारे भारतीय कैसे हैं ??"
अमेरकी बड़े ध्यान से देखने लगा, फिर बोला...
"वहां तो मैंने कोई भारतीय देखा ही नहीं."
भारतीय पुरुष उसका मुह देखने लगा !!


.
अमेरिकी बोलता रहा- "मैं एअरपोर्ट पर उतरा तो सबसे पहले मेरी भेट मराठिओं से हुई, आगे बढा तो पंजाबी,
हरियाणवी, गुजरती, बिहारी, तमिल और आसामी जैसे बहुत से लोग मिले.
कहीं हिन्दू मिले तो कहीं सिक्ख, मुस्लिम और इसाई मिले...
.
छोटी जगहों पर गया तो बनारसी, जौनपुरी, सुल्तानपुरी, बरेलवी मिले...
.
नेताओं से मिला तो कांग्रेसी, भाजपाई, बसपाई, AAP वाले ... गाँव में गया तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र मिले.
परन्तु भारतीय तो कहीं मिले ही नही.



"मैं एअरपोर्ट पर उतरा तो सबसे पहले मेरी भेट मराठिओं से हुई, आगे बढा तो पंजाबी,
हरियाणवी, गुजरती, बिहारी, तमिल और आसामी जैसे बहुत से लोग मिले.
कहीं हिन्दू मिले तो कहीं सिक्ख, मुस्लिम और इसाई मिले...
.
छोटी जगहों पर गया तो बनारसी, जौनपुरी, सुल्तानपुरी, बरेलवी मिले...
.
नेताओं से मिला तो कांग्रेसी, भाजपाई, बसपाई, AAP वाले ... गाँव में गया तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र मिले.
परन्तु भारतीय तो कहीं मिले ही नही.



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Saturday, 17 August 2013

मेरी माँ से मेरा पहचान है

मेरी माँ से मेरा पहचान है


माना कि मेरी दिलरुबा मेरी जान है !
पर इससे पहले मेरी माँ से मेरा पहचान है !!

अपनी मोहब्बत के लिए हद से भी गजर सकता हुँ मैँ !
पर माँ के लिये तो अपनी जान भी लुटा सकता हुँ मैँ !!




माना कि इश्क एक समुन्द्र - सी गहराई है !
पर माँ के कदमों मेँ तो जन्नत हमने पायी है !!

इश्क मेँ हर पल डुब जाने का दिल करता है !
पर माँ के आर्शिवाद के बिना कोइ काम कहाँ बनता है !!

इश्क मेँ कभी भी धोखा सकते हैँ !
पर माँ से तो बस प्यार ही पा सकते हैँ !!


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